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शुक्रवार, 08 मई 2026

साध्वी ऋतंभरा: राष्ट्रवाद, रामजन्मभूमि आंदोलन और सेवा का अद्भुत संगम

साध्वी ऋतंभरा: राष्ट्रवाद, रामजन्मभूमि आंदोलन और सेवा का अद्भुत संगम

साध्वी ऋतंभरा: राष्ट्रवाद, रामजन्मभूमि आंदोलन और सेवा का अद्भुत संगम

150 Visited Spiritual Speakers • Updated: Wednesday, 10 September 2025

साध्वी ऋतंभरा: राष्ट्रवाद, रामजन्मभूमि आंदोलन और सेवा का अद्भुत संगम


साध्वी ऋतंभरा: राष्ट्रवाद, रामजन्मभूमि आंदोलन और सेवा का अद्भुत संगम

परिचय

साध्वी ऋतंभरा (जन्म: 31 दिसंबर 1963) भारतीय आध्यात्मिक वक्ता, राष्ट्रवादी विचारक और समाजसेविका हैं। उन्हें विशेष रूप से रामजन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका और ओजस्वी वाणी के लिए जाना जाता है। जनवरी 2025 में भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया।


प्रारंभिक जीवन और दीक्षा

  • जन्म नाम: निशा
  • जन्म स्थान: दोराहा कस्बा, लुधियाना, पंजाब
  • 16 वर्ष की आयु में उन्होंने स्वामी परमानंद से दीक्षा ली और उनके आश्रम, हरिद्वार में रहकर आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त की।
  • धीरे-धीरे वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) के मार्गदर्शक मंडल से जुड़ीं और हिंदू जागरण अभियानों में सक्रिय हुईं।

रामजन्मभूमि आंदोलन और सक्रियता

1980-90 के दशक में साध्वी ऋतंभरा ने अपने प्रभावशाली और जोशीले भाषणों के माध्यम से हिंदू जनमानस में व्यापक जागृति फैलाई।

  • उन्होंने जन जागरण अभियान और रामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई।
  • 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान वे उपस्थित थीं और आंदोलन की अग्रणी महिला नेताओं में गिनी जाती हैं।
  • इस आंदोलन में उनके साथ उमा भारती और विजयाराजे सिंधिया भी प्रमुख महिला नेतृत्वकर्ता थीं।

विधिक मामले और विवाद

  • बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और लिब्रहान आयोग ने उन्हें दोषी ठहराया।
  • हालांकि, 30 सितंबर 2020 को CBI की विशेष अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।
  • 1995 में इंदौर में उनके भाषण को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद दंगे भड़के और उन्हें गिरफ्तार किया गया।

सामाजिक कार्य और आश्रम

  • 2002 में उन्हें मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में आश्रम निर्माण हेतु भूमि मिली और उन्होंने वात्सल्य ग्राम की स्थापना की।
  • यहाँ अनाथ बच्चों, विधवाओं, बेसहारा महिलाओं और बुजुर्गों की सेवा की जाती है।
  • इस आश्रम में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कराटे, घुड़सवारी और हथियार प्रशिक्षण भी दिया गया।
  • इसके अलावा, वे इंदौर, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में भी समाजसेवी कार्य कर रही हैं।

हाल के वर्ष

  • 31 दिसंबर 2023 को उनके 60वें जन्मदिन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोज लाल खट्टर ने वृंदावन में उनके जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया।
  • जनवरी 2024 में वे राम मंदिर, अयोध्या के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रित महिला नेताओं में शामिल थीं।

निष्कर्ष

साध्वी ऋतंभरा का जीवन राष्ट्रवाद, अध्यात्म और सेवा का अद्भुत संगम है।
जहाँ एक ओर वे अपने ओजस्वी भाषणों से हिंदू समाज में जागरण का प्रतीक बनीं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने वात्सल्य ग्राम जैसे प्रकल्पों के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों की सेवा भी की।

 


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