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शुक्रवार, 08 मई 2026

Bokaro News: अहंकार का त्याग व भक्ति ही भगवान तक पहुँचने का मार्ग — सचिन कौशिक महाराज

Bokaro News: अहंकार का त्याग व भक्ति ही भगवान तक पहुँचने का मार्ग — सचिन कौशिक महाराज

Bokaro News: अहंकार का त्याग व भक्ति ही भगवान तक पहुँचने का मार्ग — सचिन कौशिक महाराज

34 Visited Religious News • Updated: Thursday, 15 January 2026

Bokaro News: अहंकार का त्याग व भक्ति ही भगवान तक पहुँचने का मार्ग — सचिन कौशिक महाराज


Bokaro News: अहंकार का त्याग व भक्ति ही भगवान तक पहुँचने का मार्ग — सचिन कौशिक महाराज

बोकारो।
अहंकार का त्याग और सच्ची भक्ति ही ईश्वर तक पहुँचने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है। अहंकार जहाँ मनुष्य को भीतर से खोखला करता है, वहीं भक्ति उसे आत्मिक शुद्धता की ओर ले जाकर भगवान के समीप पहुँचाती है। ये प्रेरक विचार प्रसिद्ध कथावाचक सचिन कौशिक महाराज ने व्यक्त किए।

सेक्टर-9 स्थित वैशाली मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन, बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए उमड़े। कथा के दौरान सचिन कौशिक महाराज ने भागवत के गूढ़ प्रसंगों को सरल और भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया।

उन्होंने बताया कि सुखदेव महर्षि, वेदव्यास के पुत्र थे, जो जन्म से ही ज्ञानवान थे और तपस्या हेतु वन चले गए। श्रीकृष्ण के आश्वासन पर वे पुनः लौटे और राजा परीक्षित को सात दिनों में मोक्ष का मार्ग दिखाने वाली श्रीमद् भागवत कथा का उपदेश दिया।

कथा में दक्ष प्रजापति के अहंकार से जुड़े प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया। ब्रह्मा के मानसपुत्र दक्ष, उनकी पुत्री सती और भगवान शिव के बीच घटित घटनाएँ अहंकार और तपस्या के गहरे अर्थ को उजागर करती हैं। दक्ष का शिव से वैर, सती का यज्ञाग्नि में आत्मदाह, दक्ष का सिर बकरे के सिर में परिवर्तित होना और अंततः शिव को प्रसन्न कर पुनर्जन्म प्राप्त करना — ये सभी प्रसंग यह सिखाते हैं कि अहंकार विनाश का कारण और भक्ति उद्धार का मार्ग है।

सचिन कौशिक महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म कथा का भी भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कंस के अत्याचारों के अंत के लिए भगवान विष्णु ने देवकी और वसुदेव के कारागार में श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। भादो मास की अष्टमी की मध्यरात्रि में कारागार अलौकिक प्रकाश से भर गया और भगवान श्रीकृष्ण चतुर्भुज रूप (शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए) में प्रकट हुए। इसके बाद वसुदेव उन्हें यमुना पार कर गोकुल ले गए और वहाँ नंद बाबा व यशोदा को सौंप दिया। मथुरा लौटते समय वे एक कन्या (मां दुर्गा) को साथ ले गए, जिससे धर्म की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।

कथा स्थल पर प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। भक्तिमय वातावरण, भजन-कीर्तन और भागवत कथा के अमृत वचनों से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो रहा है।

 



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