मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग: श्रीशैलम का पौराणिक इतिहास और धार्मिक महत्व
115 Visited 12 Jyotirlingas • Updated: Friday, 03 April 2026

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग: दक्षिण का कैलाश
आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में कृष्णा नदी के तट पर स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को ‘दक्षिण का कैलाश’ कहा जाता है। यह मंदिर भारत का एकमात्र ऐसा स्थल है जो ज्योतिलिंग होने के साथ-साथ एक शक्तिपीठ (भ्रमराम्बा देवी) भी है।
1. पौराणिक कथा: कार्तिकेय का क्रोध और शिव-पार्वती का आगमन
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्रों गणेश और कार्तिकेय के बीच विवाह का विवाद हुआ।
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शर्त: महादेव ने कहा कि जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा करेगा, उसका विवाह पहले होगा।
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चतुराई: कार्तिकेय मयूर वाहन पर निकल पड़े, लेकिन गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा कर जीत हासिल की।
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नाराजगी: कार्तिकेय क्रोधित होकर क्रौंच पर्वत (श्रीशैलम) चले गए।
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नाम का रहस्य: माता पार्वती यहाँ ‘मल्लिका’ और महादेव ‘अर्जुन’ के रूप में प्रकट हुए। इसीलिए मंदिर का नाम मल्लिकार्जुन पड़ा।
2. इतिहास और वास्तुकला
मल्लिकार्जुन मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है और इसे कई राजवंशों ने भव्यता दी।
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सातवाहन और पल्लव: मंदिर का सबसे पुराना उल्लेख सातवाहन काल के शिलालेखों में मिलता है।
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विजयनगर साम्राज्य: वर्तमान स्वरूप और चारों ओर की प्राकार (दीवार) का निर्माण राजा हरिहर राय और कृष्णदेव राय के समय हुआ।
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छत्रपति शिवाजी महाराज: शिवाजी महाराज इस मंदिर के अनन्य भक्त थे। उन्होंने उत्तर द्वार (गोपुरम) और तीर्थयात्रियों के रहने हेतु आश्रम बनवाए।
3. मंदिर की विशेषताएं
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पातालगंगा: मंदिर के पास बहती कृष्णा नदी को यहाँ ‘पातालगंगा’ कहा जाता है। स्नान के बाद ही भक्त दर्शन करते हैं।
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भ्रमराम्बा शक्तिपीठ: मंदिर परिसर में देवी सती का ‘ग्रीवा’ भाग गिरा था। माता पार्वती को यहाँ भ्रमराम्बा के रूप में पूजा जाता है।
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स्पर्श दर्शन: भक्त स्वयं ज्योतिर्लिंग को स्पर्श और अभिषेक कर सकते हैं, जो कई अन्य ज्योतिर्लिंगों में प्रतिबंधित है।
4. धार्मिक महत्व
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केवल इस शिखर के दर्शन करने से मनुष्य पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति पा सकता है।
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आदि शंकराचार्य ने यहीं अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘शिवापराध क्षमापन स्तोत्र’ की रचना की।
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यह मंदिर न केवल भक्ति का केंद्र है, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और शक्तिपीठ की महत्ता भी प्रदान करता है।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि
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धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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यहाँ की कथा और वास्तुकला भक्तों को शिव और शक्ति के सम्मिलन की अनुभूति कराती है।
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श्रीशैलम की यात्रा, भक्ति, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव कराती है।
अगर आप मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन या यात्रा योजना के बारे में और जानकारी चाहते हैं, तो श्रीशैलम मल्लिकार्जुन मंदिर आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
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