पुरी में घूमने के लिए शीर्ष 15 प्रसिद्ध मंदिर: भगवान जगन्नाथ की पावन भूमि की सम्पूर्ण यात्रा गाइड
11 Visited Puri - The Holy City • Updated: Saturday, 18 July 2026

प्रस्तावना: चार धामों में से एक पुरी की दिव्य यात्रा
पुरी - जिसे पुरुषोत्तम पुरी, श्रीक्षेत्र और जगन्नाथ पुरी के नाम से भी जाना जाता है, भारत के चार धामों में से एक है। ओडिशा के पूर्वी तट पर बसा यह पावन नगर न केवल भगवान जगन्नाथ की लीला-भूमि है, बल्कि यहाँ सैकड़ों प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर हैं जो आस्था, वास्तुकला और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम हैं।
एक अनुभवी यात्री और धर्म इतिहासकार के रूप में, मैंने पुरी के उन 15 सबसे प्रसिद्ध मंदिरों का चयन किया है जो आपकी यात्रा को अविस्मरणीय बना देंगे। यह सम्पूर्ण गाइड आपको प्रत्येक मंदिर के इतिहास, महत्व और दर्शन की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करेगी।
1. श्री जगन्नाथ मंदिर (Shri Jagannath Temple)
पुरी का हृदय और आत्मा
- निर्माण काल: 12वीं शताब्दी (राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव)
- वास्तुकला: कलिंग शैली
- मुख्य देवता: भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा
विशेषता: यह मंदिर पुरी की पहचान है। 65 मीटर ऊँचा यह मंदिर भारत के चार धामों में से एक है। यहाँ की रथयात्रा विश्व प्रसिद्ध है। मंदिर का मुख्य गुंबद (नीलचक्र) इतना विशाल है कि इसे देखने से ही मन शांत हो जाता है।
दर्शन समय: सुबह 5:00 - रात्रि 11:00 बजे तक विशेष: गैर-हिंदू प्रवेश नहीं कर सकते
2. विमला मंदिर (Vimala Temple)
51 शक्तिपीठों में से एक आदि शक्तिपीठ
- स्थान: जगन्नाथ मंदिर परिसर के दक्षिण-पश्चिम कोने में
- मुख्य देवता: देवी विमला (आदि शक्ति)
- महत्व: शक्तिपीठ - देवी सती की नाभि गिरी थी
विशेषता: यह मंदिर जगन्नाथ मंदिर से भी प्राचीन माना जाता है। यहाँ की अनूठी परंपरा यह है कि जगन्नाथ का भोग तब तक महाप्रसाद नहीं बनता जब तक वह विमला देवी को अर्पित न हो जाए। यह शक्ति और वैष्णव धर्म के संगम का प्रतीक है।
दर्शन: जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश के बाद ही संभव
3. लोकनाथ मंदिर (Lokanath Temple)
शिव का प्राचीन धाम
- स्थान: इंद्रद्युम्न सरोवर के निकट
- मुख्य देवता: भगवान शिव (लोकनाथ)
- निर्माण काल: 11वीं शताब्दी
विशेषता: लोकनाथ का अर्थ है "लोकों के नाथ"। यह मंदिर चंदन यात्रा के लिए प्रसिद्ध है, जब भगवान जगन्नाथ स्वयं इस मंदिर पधारते हैं। मंदिर की वास्तुकला और शिवलिंग अत्यंत मनमोहक हैं।
विशेष उत्सव: महाशिवरात्रि, चंदन यात्रा
4. गुंडिचा मंदिर (Gundicha Temple)
भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर
- स्थान: पुरी शहर के मध्य में
- जगन्नाथ मंदिर से दूरी: 2.5 किमी
- महत्व: रथयात्रा का गंतव्य स्थल
विशेषता: रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा देवी यहाँ 7 दिनों तक पधारे रहते हैं। इसे 'आड़प-दर्शन' कहते हैं। यहाँ भगवान को 'पथ्य' (हल्का आहार) का भोग लगाया जाता है।
हेरा पंचमी: लक्ष्मी जी का मान-मनौवल का अद्भुत दृश्य
5. मार्कंडेश्वर मंदिर (Markandeshwar Temple)
अमरत्व का आशीर्वाद
- स्थान: मार्कंडेय सरोवर के तट पर
- मुख्य देवता: भगवान शिव
- पौराणिक कथा: ऋषि मार्कंडेय ने यहीं यमराज को पराजित किया था
विशेषता: मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। मार्कंडेय सरोवर का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है। मंदिर की प्राचीनता 10वीं-11वीं शताब्दी तक की है।
विशेष: सावन मास में विशेष महत्व
6. साक्षीगोपाल मंदिर (Sakshigopal Temple)
जहाँ कृष्ण बने साक्षी (गवाह)
- स्थान: पुरी से 20 किमी दूर
- मुख्य देवता: भगवान कृष्ण (गोपीनाथ)
- निर्माण काल: 14वीं-15वीं शताब्दी
विशेषता: पौराणिक कथा के अनुसार, एक विवाद के समाधान के लिए जब पंचों ने भगवान से पूछा, तो मूर्ति ने सिर हिलाकर 'हाँ' में उत्तर दिया। तब से वे 'साक्षीगोपाल' कहलाए। प्राचीन काल में यहाँ शपथ लेकर ही मामले निपटाए जाते थे।
यात्रा: पुरी से आसानी से पहुँचा जा सकता है
7. बेदी हनुमान मंदिर (Bedi Hanuman Temple)
दरिया महावीर - समुद्र तट पर संकटमोचन
- स्थान: समुद्र तट के निकट (200-300 मीटर)
- मुख्य देवता: भगवान हनुमान
- विशेष नाम: दरिया महावीर
विशेषता: समुद्र तट के समीप स्थित यह मंदिर अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। यहाँ हनुमान जी की बेड़ी (जंजीरों) में जकड़ी मूर्ति है, जो एक रोचक कथा से जुड़ी है। समुद्र की लहरों की ध्वनि और हनुमान चालीसा का पाठ - एक अलौकिक अनुभव।
सर्वोत्तम समय: मंगलवार और शनिवार
8. स्वर्गद्वार मंदिर (Swargadwar Temple)
मोक्ष का द्वार
- स्थान: समुद्र तट के निकट
- अर्थ: स्वर्ग का द्वार
- महत्व: अंतिम संस्कार स्थल
विशेषता: मान्यता है कि यहाँ अंतिम संस्कार करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्थान अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक है। समुद्र तट पर स्थित यह स्थान शांति और चिंतन का केंद्र है।
दर्शन: दिन भर खुला
9. सिद्धेश्वर महादेव मंदिर (Siddheswar Mahadev Temple)
सिद्धियों का दाता
- स्थान: पुरी शहर में
- मुख्य देवता: भगवान शिव
- विशेषता: सिद्धि प्राप्त करने के लिए प्रसिद्ध
विशेषता: भक्तों का मानना है कि यहाँ सच्चे मन से पूजा करने पर सभी सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत और ध्यान के लिए उपयुक्त है।
10. गौसानी मंदिर (Gausani Temple)
माँ का वात्सल्य
- स्थान: पुरी शहर में
- मुख्य देवता: देवी गौसानी (दुर्गा का रूप)
- महत्व: स्थानीय देवी
विशेषता: यह मंदिर स्थानीय लोगों में अत्यंत लोकप्रिय है। नवरात्रि के दौरान यहाँ भव्य आयोजन होता है। देवी का रूप अत्यंत कृपालु और वात्सल्यपूर्ण है।
11. इंद्रद्युम्न सरोवर और मंदिर (Indradyumna Tank)
पवित्र स्नान का स्थान
- स्थान: जगन्नाथ मंदिर के निकट
- निर्माता: राजा इन्द्रद्युम्न
- महत्व: पवित्र स्नान
विशेषता: इस सरोवर में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। यहाँ अनेक छोटे-छोटे मंदिर हैं। स्नान यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ यहाँ स्नान करते हैं।
12. तुलसी मंदिर (Tulasi Temple)
तुलसी माता का आशीर्वाद
- स्थान: पुरी में
- मुख्य देवता: तुलसी माता
- महत्व: तुलसी की पूजा
विशेषता: तुलसी माता को समर्पित यह मंदिर शांति और पवित्रता का प्रतीक है। यहाँ तुलसी के पौधे की विशेष पूजा होती है।
13. रामा मंदिर (Rama Temple)
मर्यादा पुरुषोत्तम का धाम
- स्थान: पुरी शहर में
- मुख्य देवता: भगवान राम, सीता, लक्ष्मण
- वास्तुकला: पारंपरिक ओडिया शैली
विशेषता: राम नवमी के दौरान यहाँ भव्य आयोजन होता है। मंदिर की मूर्तियाँ अत्यंत सुंदर और मनमोहक हैं।
14. शिव मंदिर (कपिलेश्वर) (Kapileswar Temple)
प्राचीन शिव पीठ
- स्थान: पुरी के निकट
- मुख्य देवता: भगवान शिव (कपिलेश्वर)
- महत्व: प्राचीन शिवलिंग
विशेषता: यह मंदिर अपनी प्राचीनता और शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि पर यहाँ हजारों भक्त आते हैं।
15. अल्मरनाथ मंदिर (Alarnath Temple)
भगवान का 'अनसर' (विश्राम) स्थल
- स्थान: पुरी से लगभग 25 किमी (ब्रह्मगिरि)
- मुख्य देवता: भगवान जगन्नाथ (अल्मरनाथ)
- विशेष महत्व: स्नान यात्रा के बाद 15 दिनों का विश्राम स्थल
विशेषता: जब भगवान जगन्नाथ स्नान यात्रा के बाद 'असुस्थ' हो जाते हैं, तो वे यहाँ 15 दिनों तक अनसर (विश्राम) में रहते हैं। इस दौरान भक्त यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। यह स्थान अत्यंत पवित्र और शांत है।
व्यावहारिक यात्रा जानकारी
🗓️ सर्वोत्तम यात्रा समय
- अक्टूबर से मार्च: मौसम सुहावना
- रथयात्रा (जून-जुलाई): विशेष अनुभव (भीड़ अधिक)
- परिहार्य: अप्रैल-जून (गर्मी), जुलाई-सितंबर (मानसून)
🚗 कैसे पहुँचें
वायु मार्ग:
- निकटतम हवाई अड्डा: भुवनेश्वर (60 किमी)
- टैक्सी/बस द्वारा पुरी पहुँच सकते हैं
रेल मार्ग:
- पुरी रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा
- नियमित ट्रेनें उपलब्ध
सड़क मार्ग:
- भुवनेश्वर, कटक, कोलकाता से नियमित बस सेवा
आवास
- बजट: धर्मशालाएँ, लॉज
- मध्यम: निजी होटल
- लग्जरी: समुद्र तट रिसॉर्ट्स
महत्वपूर्ण सुझाव
- जगन्नाथ मंदिर: गैर-हिंदू प्रवेश नहीं कर सकते
- वस्त्र: पारंपरिक और स्वच्छ वस्त्र पहनें
- जूते-चप्पल: मंदिरों में बाहर उतारें
- फोटोग्राफी: अधिकांश मंदिरों में प्रतिबंधित
- समय: सुबह जल्दी दर्शन करें (भीड़ कम)
- प्रसाद: जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद अवश्य लें
- पानी: गर्मी में पर्याप्त पानी साथ रखें
निष्कर्ष: एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक यात्रा
पुरी के ये 15 मंदिर न केवल धार्मिक स्थल हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, वास्तुकला और आध्यात्मिकता के जीवंत प्रमाण हैं। प्रत्येक मंदिर की अपनी एक अनूठी कथा, अपना इतिहास और अपना आध्यात्मिक महत्व है।
जगन्नाथ मंदिर जहाँ भक्ति का केंद्र है, वहीं विमला मंदिर शक्ति की उपासना का प्रतीक है। लोकनाथ और मार्कंडेश्वर शिव की आराधना के केंद्र हैं, जबकि साक्षीगोपाल सत्य की विजय का संदेश देता है।
एक यात्री के रूप में मेरा सुझाव है कि आप कम से कम 3-4 दिन पुरी के लिए निर्धारित करें, ताकि आप इन सभी मंदिरों के दर्शन शांतिपूर्वक कर सकें। प्रत्येक मंदिर आपको एक नया आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगा।
जय जगन्नाथ!
जय श्री कृष्ण!
हर हर महादेव!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: पुरी में कुल कितने मंदिर हैं?
उत्तर: पुरी में सैकड़ों मंदिर हैं, जिनमें से 15 सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 2: जगन्नाथ मंदिर में गैर-हिंदू प्रवेश कर सकते हैं?
उत्तर: नहीं, जगन्नाथ मंदिर में केवल हिंदू ही प्रवेश कर सकते हैं।
प्रश्न 3: रथयात्रा कब होती है?
उत्तर: आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (जून-जुलाई) को रथयात्रा मनाई जाती है।
प्रश्न 4: पुरी घूमने में कितने दिन लगते हैं?
उत्तर: मुख्य मंदिरों के दर्शन के लिए 3-4 दिन पर्याप्त हैं।
प्रश्न 5: क्या पुरी में प्रसाद मिलता है?
उत्तर: हाँ, जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद विश्व प्रसिद्ध है।
Keywords : temple अत्यंत जगन्नाथ दर्शन देवता देवी पुरी प्रसिद्ध भगवान मंदिर महत्व मुख्य यहाँ यात्रा विशेष विशेषता शिव समुद्र स्थान स्नान
🔔 हमारे YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें:
👉 https://www.youtube.com/channel/UC76hj0iZcKkiW1YizHs0n2Q/
📘 Facebook Page:
👉 https://www.facebook.com/DigiTatvaPlus
🌿 वेबसाइट विजिट करें:
👉 https://www.bhaktipulse.com/
👉 https://www.bhaktipulse.com/video
✨ Guest Post Invitation – Share Your Divine Wisdom
🙏 Welcome to BhaktiPulse – your spiritual companion for Aarti, Chalisa, Bhajan, Mantra, and divine stories.
🌸 Do you have spiritual knowledge, devotional content, experiences, or stories that can inspire others?
📖 We warmly invite you to contribute your valuable content and become a part of our growing spiritual community.
✨ Your content may include:
- 🪔 Aarti, Chalisa, Mantra, Bhajan
- 📜 Spiritual stories & life lessons
- 🔍 Unknown facts & scientific reasons in Sanatan Dharma
- 🌿 Ayurveda, rituals, and traditions
💡 If your content aligns with our vision, we will proudly feature it on BhaktiPulse.
📩 Submit your content or contact us here:
👉 https://www.bhaktipulse.com/contact.php
🌼 Let your words spread devotion, ज्ञान, and positivity to the world.
🙏 Join us in this divine journey!
💬 Comments
Approved Comments