श्री चित्रगुप्त चालीसा
25 Visited Lord Chitragupta • Updated: Tuesday, 15 September 2026

श्री चित्रगुप्त चालीसा | Shree Chitragupta Chalisa | Shree Chitragupta Ji Bhajan
जय चित्रगुप्त महाराज 🙏
भगवान चित्रगुप्त को सनातन परंपरा में कर्मों के लेखाकार और धर्मराज यम के सहयोगी के रूप में स्मरण किया जाता है। मान्यता है कि मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्मों का लेखा उनके पास रहता है और इसी कारण भगवान चित्रगुप्त की आराधना को सत्य, न्याय, धर्म और सदाचार से जोड़ा जाता है।
चित्रगुप्त चालीसा भगवान चित्रगुप्त की स्तुति का एक लोकप्रिय भक्तिपूर्ण पाठ है। इसमें उनके ज्ञान, कर्म-लेखा, धर्म और न्याय से जुड़े स्वरूप का स्मरण किया जाता है। चालीसा का आरंभ भगवान चित्रगुप्त को नमन करते हुए होता है और आगे उनके दिव्य कार्यों तथा कर्म के सिद्धांत का वर्णन मिलता है। उपलब्ध प्रचलित पाठों में 40 चौपाइयों के साथ दोहों की संरचना मिलती है।
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यदि आप भगवान चित्रगुप्त जी की चालीसा सुनना चाहते हैं, तो नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं:
Shree Chitragupta Ji Maharaj Chalisa | जय चित्रगुप्त महाराज चालीसा | Karm Ke Lekhankar Ki Mahima
चित्रगुप्त चालीसा का वीडियो देखें
यह प्रस्तुति DigiTatva द्वारा प्रकाशित है और इसमें भगवान चित्रगुप्त महाराज की चालीसा को भक्ति भाव के साथ प्रस्तुत किया गया है।
भगवान चित्रगुप्त कौन हैं?
हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान चित्रगुप्त का संबंध कर्म और न्याय से माना जाता है। धार्मिक कथाओं में उन्हें धर्मराज यम के यहाँ जीवों के कर्मों का लेखा रखने वाला दिव्य लेखाकार बताया गया है।
उनका स्वरूप विशेष रूप से लेखनी, दवात और कर्म-पुस्तिका से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। यही कारण है कि चित्रगुप्त पूजा के अवसर पर कई परिवारों और विशेष रूप से कायस्थ समाज में कलम, दवात और बही-खाते की पूजा करने की परंपरा रही है।
यह परंपरा केवल लेखा रखने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक सुंदर संदेश भी दिखाई देता है—मनुष्य को अपने कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए।
चित्रगुप्त चालीसा का भाव क्या है?
चित्रगुप्त चालीसा केवल भगवान की स्तुति नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को कर्म और उसके परिणाम के बारे में सोचने का अवसर भी देती है।
चालीसा के आरंभिक दोहों में भगवान चित्रगुप्त को नमन किया जाता है और उनकी कृपा की प्रार्थना की जाती है। आगे की चौपाइयों में उनके ज्ञान, धर्म-अधर्म के विवेक और सृष्टि के संतुलन में उनकी भूमिका का वर्णन मिलता है।
चालीसा का एक प्रसिद्ध आरंभिक भाव है—
“सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश...”
अर्थात भक्त भगवान चित्रगुप्त का स्मरण करते हुए श्रद्धा से अपना शीश झुकाता है।
चालीसा में भगवान चित्रगुप्त के हाथों में कलम, दवात और कर्म-पुस्तिका जैसे प्रतीकों का भी धार्मिक भाव से संबंध दिखाई देता है।
चित्रगुप्त चालीसा का पाठ कब करें?
चित्रगुप्त चालीसा का पाठ किसी विशेष एक दिन तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए। श्रद्धालु अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार इसका पाठ कर सकते हैं।
विशेष रूप से इसे इन अवसरों पर पढ़ा जा सकता है—
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चित्रगुप्त पूजा
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यम द्वितीया / भाई दूज के आसपास
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चित्रगुप्त जयंती
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नियमित दैनिक पूजा
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किसी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले
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सुबह या शाम शांत मन से
चित्रगुप्त पूजा की परंपरा में दीपावली के बाद आने वाली यम द्वितीया का विशेष महत्व माना जाता है, हालांकि विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं में पूजा से जुड़े अवसरों में अंतर भी मिलता है।
चित्रगुप्त चालीसा पढ़ने का धार्मिक महत्व
भक्तों की श्रद्धा में चालीसा पाठ का महत्व केवल किसी भौतिक लाभ की कामना तक सीमित नहीं है। इसका सबसे महत्वपूर्ण संदेश अपने कर्मों के प्रति जागरूक होना है।
चित्रगुप्त जी का स्मरण करते समय मन में यह विचार रखा जा सकता है कि—
हमारे कर्म ही हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं।
इस दृष्टि से चालीसा का पाठ व्यक्ति को सत्य, ईमानदारी, संयम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे सकता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा से भगवान चित्रगुप्त का स्मरण करने से मन में न्याय और सदाचार की भावना मजबूत होती है। हालांकि ऐसे आध्यात्मिक लाभों को व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक विश्वास के रूप में ही समझना उचित है।
कलम और दवात की पूजा क्यों की जाती है?
भगवान चित्रगुप्त के साथ कलम और दवात का संबंध बहुत गहरा है।
कलम को ज्ञान और लेखन का प्रतीक माना जाता है, जबकि दवात उस ज्ञान को सुरक्षित रूप से दर्ज करने का माध्यम है। कर्म-पुस्तिका मनुष्य के कर्मों के लेखे का धार्मिक प्रतीक मानी जाती है।
इसी कारण चित्रगुप्त पूजा के समय कई परिवारों में कलम, दवात, कॉपी, बही-खाता या लेखन सामग्री को भगवान के सामने रखकर पूजा करने की परंपरा है।
आज के समय में इसका एक आधुनिक अर्थ भी निकाला जा सकता है—ज्ञान, जिम्मेदारी और अपने कार्यों के प्रति ईमानदारी।
चित्रगुप्त चालीसा और कायस्थ समाज
भगवान चित्रगुप्त को कायस्थ समाज के आराध्य देव के रूप में विशेष श्रद्धा प्राप्त है। कायस्थ परंपराओं में चित्रगुप्त जी को लेखन, प्रशासन, ज्ञान और कर्म-लेखा से जोड़ा जाता है।
चित्रगुप्त चालीसा में भगवान के परिवार और उनके वंश से जुड़ी परंपराओं का भी उल्लेख मिलता है। कुछ प्रचलित पाठों में भगवान चित्रगुप्त के पुत्रों और उनसे जुड़ी कायस्थ शाखाओं का वर्णन किया गया है। इन विवरणों को धार्मिक एवं सामुदायिक परंपरा के रूप में समझना चाहिए; अलग-अलग क्षेत्रों में इनके विवरण और नामों में अंतर मिल सकता है।
चित्रगुप्त चालीसा का सबसे सुंदर संदेश
चित्रगुप्त चालीसा को केवल एक धार्मिक पाठ मानकर पढ़ना इसके संदेश के एक महत्वपूर्ण हिस्से को छोड़ देना होगा।
इसमें छिपा मूल भाव है—
कर्म से कोई बच नहीं सकता।
मनुष्य दुनिया से अपने कर्मों को छिपा सकता है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से उसके कर्मों का लेखा कहीं न कहीं दर्ज होता है। इसलिए जीवन में ऐसा कार्य करना चाहिए जिसे स्वयं अपने अंतर्मन के सामने रखने में संकोच न हो।
भगवान चित्रगुप्त की आराधना हमें यही याद दिलाती है कि—
लेखा कहीं बाहर नहीं, हमारे कर्मों में ही लिखा जा रहा है।
चित्रगुप्त चालीसा का पाठ कैसे करें?
यदि आप घर पर चित्रगुप्त चालीसा का पाठ करना चाहते हैं, तो बहुत कठिन विधि की आवश्यकता नहीं है।
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ करें और भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।
इसके बाद श्रद्धा से प्रार्थना करें—
“हे भगवान चित्रगुप्त महाराज, मुझे सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की बुद्धि प्रदान करें। मेरे कर्मों को शुद्ध रखने की शक्ति दें।”
इसके बाद चित्रगुप्त जी का स्मरण करके चालीसा का पाठ करें।
अंत में आरती या अपनी परंपरा के अनुसार प्रार्थना करके प्रसाद अर्पित करें।
यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात विधि से अधिक श्रद्धा और भाव है।
चित्रगुप्त चालीसा सुनने के लिए
अगर आप पाठ पढ़ने के बजाय भजन के रूप में चित्रगुप्त चालीसा सुनना चाहते हैं, तो हमारा यह वीडियो देखें:
Shree Chitragupta Ji Maharaj Chalisa | जय चित्रगुप्त महाराज चालीसा | Karm Ke Lekhankar Ki Mahima
▶️ YouTube पर चित्रगुप्त चालीसा सुनें
भक्ति के साथ चालीसा सुनते हुए भगवान चित्रगुप्त के उस स्वरूप का ध्यान करें जो ज्ञान, लेखा, न्याय और धर्म का प्रतीक माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चित्रगुप्त चालीसा क्या है?
चित्रगुप्त चालीसा भगवान चित्रगुप्त की स्तुति में रचित भक्तिपूर्ण पाठ है। इसमें उनके ज्ञान, कर्म-लेखा और धर्म से जुड़े स्वरूप का वर्णन मिलता है।
चित्रगुप्त चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
इसे किसी भी दिन श्रद्धा से पढ़ा जा सकता है। चित्रगुप्त पूजा, यम द्वितीया और चित्रगुप्त जयंती जैसे अवसरों पर इसका विशेष रूप से पाठ किया जाता है।
क्या चित्रगुप्त जी केवल कायस्थ समाज के देवता हैं?
कायस्थ समाज में भगवान चित्रगुप्त की विशेष आराधना होती है और उन्हें समाज का आराध्य देव माना जाता है। लेकिन धार्मिक दृष्टि से भगवान चित्रगुप्त की पूजा और स्मरण केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है।
चित्रगुप्त जी के साथ कलम और दवात क्यों दिखाई जाती है?
कलम और दवात उनके लेखाकार स्वरूप तथा ज्ञान और कर्मों के लेखे के प्रतीक माने जाते हैं।
क्या चित्रगुप्त चालीसा सुनने से मनोकामना पूरी होती है?
भक्तों की आस्था में भगवान की भक्ति और चालीसा पाठ का आध्यात्मिक महत्व है। मनोकामना पूरी होने का दावा निश्चित परिणाम के रूप में नहीं किया जा सकता। चालीसा का मूल संदेश सद्कर्म, धर्म और आत्मचिंतन से जुड़ा है।
निष्कर्ष
भगवान चित्रगुप्त की चालीसा हमें केवल एक देवता की स्तुति करने के लिए प्रेरित नहीं करती, बल्कि अपने कर्मों को देखने और सुधारने का अवसर भी देती है।
कलम हमें ज्ञान की याद दिलाती है, दवात जिम्मेदारी की, और कर्म-पुस्तिका हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन में हम क्या लिख रहे हैं।
इसलिए जब भी भगवान चित्रगुप्त का स्मरण करें, एक छोटी-सी प्रार्थना जरूर करें—
“हे चित्रगुप्त महाराज, मेरे कर्म ऐसे हों जिन्हें आपके सामने रखने में मुझे कभी लज्जा न हो।”
जय श्री चित्रगुप्त महाराज। 🙏
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