श्री गोपाल चालीसा
22 Visited Chalisa Collection • Updated: Tuesday, 15 September 2026

श्री गोपाल चालीसा: संपूर्ण पाठ, कथा, महत्व और पूजा विधि
राधे-राधे। जय श्रीकृष्ण। 🙏
जब हम भगवान श्रीकृष्ण का नाम लेते हैं, तो उनके अनेक रूप हमारे मन में आते हैं—माखन चुराने वाले नटखट कान्हा, बांसुरी बजाने वाले श्याम, गोपियों के प्रिय गोविंद, ग्वाल-बालों के सखा और धर्म की स्थापना करने वाले योगेश्वर।
लेकिन गोपाल का रूप कुछ अलग ही अपनापन लिए हुए है। सिर पर मोरपंख, हाथ में बांसुरी, आसपास गायें और चेहरे पर मन मोह लेने वाली मुस्कान—यह वही कृष्ण हैं, जिन्हें ब्रज के लोग प्रेम से अपना बालक मानते थे।
श्री गोपाल चालीसा भगवान श्रीकृष्ण की इन्हीं लीलाओं का सुंदर स्मरण कराती है। इसमें उनके जन्म से लेकर गोकुल की बाल लीलाओं, कालिया नाग के दमन, गोवर्धन धारण, कंस वध, सुदामा के प्रति प्रेम और महाभारत में अर्जुन को दिए गए गीता ज्ञान तक की झलक मिलती है। प्रचलित पाठ में श्रीकृष्ण के विभिन्न अवतारों और भक्तों पर उनकी कृपा का भी वर्णन आता है।
श्री गोपाल चालीसा क्या है?
गोपाल चालीसा भगवान श्रीकृष्ण के गोपाल स्वरूप को समर्पित भक्तिपूर्ण रचना है। इसमें श्रीकृष्ण को ब्रज के पालनहार, गोवर्धनधारी, भक्तवत्सल और राधारमण के रूप में याद किया गया है।
इस चालीसा की शुरुआत श्री राधा जी और यमुना तट के स्मरण से होती है। आगे श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर उनके विराट और धर्मरक्षक स्वरूप तक का वर्णन मिलता है।
🕉️ श्री गोपाल चालीसा
॥ दोहा ॥
श्री राधापद कमल रज, सिर धरि यमुना कूल।
वरणो चालीसा सरस, सकल सुमंगल मूल॥
प्रणत पाल अशरण शरण, करुणा सिंधु ब्रजेश।
चालीसा के संग मोहि, अपनावहु प्राणेश॥
॥ चौपाई ॥
जय जय पूरण ब्रह्म बिहारी।
दुष्ट दलन लीला अवतारी॥
जो कोई तुम्हरी लीला गावै।
बिन श्रम सकल पदारथ पावै॥
श्री वसुदेव देवकी माता।
प्रकट भये संग हलधर भ्राता॥
मथुरा सों प्रभु गोकुल आये।
नन्द भवन में बजत बधाये॥
जो विष देन पूतना आई।
सो मुक्ति दै धाम पठाई॥
तृणावर्त राक्षस संहारयौ।
पग बढ़ाय सकटासुर मारयौ॥
खेल खेल में माटी खाई।
मुख में सब जग दियो दिखाई॥
गोपिन घर घर माखन खायो।
जसुमति बाल केलि सुख पायो॥
ऊखल सों निज अंग बँधाई।
यमलार्जुन जड़ योनि छुड़ाई॥
बका असुर की चोंच विदारी।
विकट अघासुर दियो सँहारी॥
ब्रह्मा बालक वत्स चुराये।
मोहन को मोहन हित आये॥
बाल वत्स सब बने मुरारी।
ब्रह्मा विनय करी तब भारी॥
कालिय नाग नाथि भगवाना।
दावानल को कीन्हों पाना॥
सखान संग खेलत सुख पायो।
श्रीदामा निज कन्ध चढ़ायो॥
चीर हरण करि सीख सिखाई।
नख पर गिरवर लियो उठाई॥
दरस यज्ञ पत्निन को दीन्हों।
राधा प्रेम सुधा सुख लीन्हों॥
नन्दहिं वरुण लोक सों लाये।
ग्वालन को निज लोक दिखाये॥
शरद चन्द्र लखि वेणु बजाई।
अति सुख दीन्हों रास रचाई॥
अजगर सों पितु चरण छुड़ायो।
शंखचूड़ को मूड़ गिरायो॥
हने अरिष्टासुर अरु केशी।
व्योमासुर मार्यो छल वेषी॥
व्याकुल ब्रज तजि मथुरा आये।
मारि कंस यदुवंश बसाये॥
मात पिता की बन्दि छुड़ाई।
सान्दीपन गृह विद्या पाई॥
पुनि पठयौ ब्रज ऊधौ ज्ञानी।
प्रेम देखि सुधि सकल भुलानी॥
कीन्हीं कुबरी सुन्दर नारी।
हरि लाये रुक्मिणि सुकुमारी॥
भौमासुर हनि भक्त छुड़ाये।
सुरन जीति सुरतरु महि लाये॥
दन्तवक्र शिशुपाल संहारे।
खग मृग नृग अरु बधिक उधारे॥
दीन सुदामा धनपति कीन्हों।
पारथ रथ सारथि यश लीन्हों॥
गीता ज्ञान सिखावन हारे।
अर्जुन मोह मिटावन हारे॥
केला भक्त विदुर घर पायो।
युद्ध महाभारत रचवायो॥
द्रुपद सुता को चीर बढ़ायो।
गर्भ परीक्षित जरत बचायो॥
कच्छ मच्छ वाराह अहीशा।
वामन कल्कि बुद्धि मुनीशा॥
ह्वै नृसिंह प्रह्लाद उबार्यो।
राम रूप धरि रावण मार्यो॥
जय मधु कैटभ दैत्य हनैया।
अम्बरीष प्रिय चक्र धरैया॥
व्याध अजामिल दीन्हें तारी।
शबरी अरु गणिका सी नारी॥
गरुड़ासन गज फन्द निकन्दन।
देहु दरश ध्रुव नयनानन्दन॥
देहु शुद्ध सन्तन कर संगा।
बाढ़ै प्रेम भक्ति रस रंगा॥
देहु दिव्य वृन्दावन बासा।
छूटै मृग तृष्णा जग आशा॥
तुम्हरो ध्यान धरत शिव नारद।
शुक सनकादिक ब्रह्म विशारद॥
जय जय राधारमण कृपाला।
हरण सकल संकट भ्रम जाला॥
बिनसैं विघ्न रोग दुःख भारी।
जो सुमरै जगपति गिरधारी॥
॥ समापन छंद ॥
गोपाल चालीसा पढ़े नित, नेम सों चित्त लगावई।
सो दिव्य तन धरि अन्त महँ, गोलोक धाम सिधावई॥
संसार सुख सम्पत्ति सकल, जो भक्तजन मन चाहें।
जयरामदेव सदैव सो, गुरुदेव दया सों लहैं॥
🌸 गोपाल चालीसा में श्रीकृष्ण की कौन-कौन सी लीलाएँ हैं?
गोपाल चालीसा की सबसे सुंदर बात यह है कि इसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को केवल एक घटना के रूप में नहीं देखा गया है। इसमें उनके बाल रूप से लेकर धर्मस्थापना तक की यात्रा दिखाई देती है।
माखन चोरी और बाल लीलाएँ
गोकुल में कृष्ण की बाल लीलाएँ भक्तों के लिए प्रेम और आनंद का विषय हैं। माखन चोरी की कथा में भगवान का नटखट बाल रूप दिखाई देता है।
पूतना उद्धार
पूतना कृष्ण को विष देने के उद्देश्य से आई थी, लेकिन कृष्ण ने उसका अंत करने के साथ उसे मुक्ति प्रदान की—यह प्रसंग भगवान के करुणामय स्वरूप से भी जोड़ा जाता है।
कालिया नाग का दमन
यमुना में कालिया नाग के कारण ब्रजवासी भयभीत थे। कृष्ण ने कालिया का दमन कर लोगों के मन से भय दूर किया।
गोवर्धन धारण
इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध लीलाओं में से एक है।
कंस वध
बाद में कृष्ण मथुरा पहुँचे और अत्याचारी कंस का अंत किया। यह प्रसंग अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।
सुदामा से मित्रता
श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता हमें बताती है कि सच्चा संबंध धन-दौलत से नहीं, प्रेम और अपनत्व से बनता है।
गीता का ज्ञान
महाभारत के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को श्रीकृष्ण ने जो ज्ञान दिया, वही आगे श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में प्रसिद्ध हुआ। गोपाल चालीसा में भी कृष्ण के इस मार्गदर्शक स्वरूप का स्मरण किया गया है।
🪔 श्री गोपाल चालीसा का पाठ कैसे करें?
गोपाल चालीसा पढ़ने के लिए किसी जटिल पूजा-विधि की आवश्यकता नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा और मन की एकाग्रता।
सुबह स्नान के बाद या शाम को स्वच्छ होकर भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर या लड्डू गोपाल के सामने दीपक जलाया जा सकता है।
इसके बाद:
- सबसे पहले श्री गणेश जी का स्मरण करें।
- श्री राधा-कृष्ण को प्रणाम करें।
- दीपक और धूप अर्पित करें।
- भगवान को तुलसी दल या उपलब्ध पुष्प अर्पित करें।
- कुछ क्षण शांत होकर श्रीकृष्ण का ध्यान करें।
- श्रद्धा से श्री गोपाल चालीसा का पाठ करें।
- अंत में श्रीकृष्ण का नाम जपें।
- प्रसाद अर्पित करके परिवार के सुख-शांति की प्रार्थना करें।
यदि आपके घर में लड्डू गोपाल की सेवा होती है, तो चालीसा का पाठ दैनिक पूजा के समय भी किया जा सकता है।
📿 गोपाल चालीसा कब पढ़ें?
श्रीकृष्ण की भक्ति के लिए किसी एक दिन की बाध्यता नहीं है। भक्त इसे प्रतिदिन पढ़ सकते हैं।
विशेष रूप से इन अवसरों पर गोपाल जी का स्मरण किया जाता है:
- जन्माष्टमी
- बुधवार
- एकादशी
- श्रीकृष्ण से जुड़े विशेष व्रत और उत्सव
- प्रातःकालीन पूजा
- संध्या आरती
- घर में लड्डू गोपाल की दैनिक सेवा
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि भक्ति केवल दिन देखकर नहीं, भाव से होती है।
🌿 श्री गोपाल चालीसा का आध्यात्मिक महत्व
गोपाल चालीसा का पाठ भक्त को श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का स्मरण कराता है। इसमें बाल-कृष्ण का वात्सल्य है, गोवर्धनधारी का साहस है, सुदामा के प्रति मित्रता है और अर्जुन के सारथी का ज्ञान है।
इसीलिए इसका पाठ केवल किसी इच्छा की पूर्ति की भावना से ही नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण के चरित्र और उनके संदेश को याद करने के लिए भी किया जा सकता है।
भक्तों की मान्यता है कि कृष्ण नाम और उनकी लीलाओं का स्मरण मन को भक्ति और शांति की ओर ले जाता है। ऐसे आध्यात्मिक अनुभव व्यक्ति की श्रद्धा और साधना पर निर्भर करते हैं; इन्हें किसी निश्चित सांसारिक परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं लेना चाहिए।
🦚 गोपाल जी को क्या अर्पित करें?
भगवान कृष्ण को सरल और प्रेम से अर्पित की गई वस्तुएँ भक्तिभाव में विशेष मानी जाती हैं।
पूजा में श्रद्धा के अनुसार अर्पित कर सकते हैं:
- तुलसी दल
- माखन-मिश्री
- दूध
- दही
- फल
- पंजीरी
- धनिया पंजीरी
- मिठाई
- घर का बना सात्त्विक भोग
सबसे महत्वपूर्ण वस्तु भोग नहीं, भाव है।
🕉️ श्री गोपाल जी का सरल मंत्र
पूजा के दौरान इस सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है:
ॐ गोपालाय नमः।
या प्रेम से:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
और सबसे सरल रूप में—
**राधे कृष्ण, राधे कृष्ण।
कृष्ण कृष्ण, राधे राधे।**
❤️ गोपाल चालीसा हमें क्या सिखाती है?
श्रीकृष्ण की लीलाएँ केवल धार्मिक कथाएँ नहीं हैं; उनमें जीवन के कई सुंदर संदेश भी छिपे हैं।
माखन चोरी हमें कृष्ण के बाल स्वरूप की सहजता और आनंद की याद दिलाती है।
गोवर्धन लीला हमें सामूहिकता और प्रकृति के प्रति सम्मान का भाव देती है।
सुदामा प्रसंग सच्ची मित्रता और विनम्रता की याद दिलाता है।
गीता का उपदेश हमें कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्य और विवेक को याद रखने की प्रेरणा देता है।
और राधा-कृष्ण का प्रेम भक्तिभाव की उस परंपरा का प्रतीक है जिसमें प्रेम को ईश्वर से जुड़ने का माध्यम माना गया है।
🙏 श्री गोपाल जी से प्रार्थना
हे नंदलाल,
हे यशोदानंदन,
हे राधारमण,
हे गोवर्धनधारी!
हमारे मन में प्रेम और करुणा बनाए रखें।
अहंकार से दूर रखें और सही मार्ग पर चलने की शक्ति दें।
जहाँ मन में भय हो, वहाँ विश्वास दें।
जहाँ निराशा हो, वहाँ आशा दें।
जहाँ मन भटक जाए, वहाँ अपनी भक्ति का सहारा दें।
हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें और हमें ऐसा जीवन जीने की प्रेरणा दें जिसमें प्रेम, सत्य, सेवा और धर्म का स्थान सबसे ऊपर हो।
राधे राधे।
जय श्रीकृष्ण।
जय गोपाल। 🙏🦚
❓ श्री गोपाल चालीसा से जुड़े प्रश्न
श्री गोपाल चालीसा किस भगवान को समर्पित है?
श्री गोपाल चालीसा भगवान श्रीकृष्ण के गोपाल स्वरूप को समर्पित है। गोपाल का अर्थ सामान्यतः गायों के पालनकर्ता या गौपालक के रूप में लिया जाता है।
क्या गोपाल चालीसा और कृष्ण चालीसा एक ही हैं?
दोनों भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित चालीसा हैं, लेकिन इनके पाठ अलग हो सकते हैं। गोपाल चालीसा में विशेष रूप से श्रीकृष्ण की ब्रज, गोकुल और गोपाल स्वरूप से जुड़ी लीलाओं का वर्णन मिलता है।
क्या लड्डू गोपाल की पूजा में गोपाल चालीसा पढ़ सकते हैं?
हाँ। यदि घर में लड्डू गोपाल की सेवा की जाती है, तो दैनिक पूजा के समय श्रद्धा से गोपाल चालीसा का पाठ किया जा सकता है।
गोपाल चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
इसे सुबह या शाम किसी भी समय पढ़ा जा सकता है। जन्माष्टमी, एकादशी और श्रीकृष्ण की विशेष पूजा के अवसर पर भी इसका पाठ किया जाता है।
गोपाल जी को क्या भोग लगाएँ?
माखन-मिश्री, दूध, दही, फल, पंजीरी और अन्य सात्त्विक घर का बना भोजन श्रद्धा से अर्पित किया जा सकता है।
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