श्री शाकंभरी माता चालीसा
26 Visited Chalisa Collection • Updated: Tuesday, 15 September 2026

श्री शाकंभरी माता चालीसा: संपूर्ण पाठ, कथा, महत्व और पाठ विधि
श्री शाकंभरी माता चालीसा माँ आदिशक्ति के उस स्वरूप को समर्पित भक्तिपूर्ण पाठ है, जिन्हें शाकंभरी देवी के नाम से पूजा जाता है। धार्मिक परंपरा में माता शाकंभरी को अन्न, वनस्पति, फल-सब्जियों और जीवनदायिनी प्रकृति से जोड़ा जाता है।
“शाकंभरी” नाम का संबंध शाक अर्थात वनस्पति और सब्जियों से माना जाता है। देवी के इस स्वरूप में प्रकृति और जीव-जगत के प्रति करुणा का भाव दिखाई देता है।
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में माँ शाकंभरी के मंदिर और उनकी उपासना की अलग-अलग परंपराएँ हैं। विशेष रूप से शाकंभरी नवरात्रि के अवसर पर भक्त माता की पूजा, कथा और भजन-कीर्तन करते हैं।
🌺 माँ शाकंभरी देवी की कथा
धार्मिक कथाओं में एक समय पृथ्वी पर भयंकर सूखा पड़ने और वर्षा के अभाव से जीव-जगत के संकट में पड़ने का वर्णन मिलता है।
कथा के अनुसार, उस कठिन समय में देवी ने करुणामयी शाकंभरी रूप धारण किया। उनके शरीर से उत्पन्न विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों, फलों और शाक-सब्जियों के माध्यम से प्राणियों के लिए जीवन का आधार उपलब्ध हुआ।
इसी कारण देवी को शाकंभरी, अर्थात शाक-वनस्पतियों को धारण/प्रदान करने वाली देवी, के रूप में स्मरण किया जाता है।
देवी की कथा का मुख्य भाव है—प्रकृति, अन्न और जीवन के प्रति कृतज्ञता।
🕉️ श्री शाकंभरी माता चालीसा
॥ दोहा ॥
श्री गुरु चरण सरोज रज,
निज मन मुकुर सुधार।
शाकंभरी माता विमल यश,
बरनौं बारंबार॥
जय जगदंबे मात भवानी।
दीनन की तुम हो महारानी॥
॥ चौपाई ॥
जय जय शाकंभरी माता।
जय जगजननी जग की त्राता॥
शताक्षी रूप धरा भवानी।
करुणामयी मात कल्याणी॥
दीन दुखी की तुम रखवाली।
भक्तों की हो मात निराली॥
अन्नपूर्णा रूप तुम्हारा।
जगत में फैला यश सारा॥
शाक फल और मूल खिलाए।
सूखे वन में हरियाली लाए॥
जीव-जगत का संकट हारा।
माता ने सबको दिया सहारा॥
नयन तुम्हारे करुणा धारा।
दुख हरती हो मात हमारा॥
शत नेत्रों से अश्रु बहाए।
जल के स्रोत जगत में लाए॥
वन उपवन फिर हरे-भरे।
खुश हुए नर-नारी सब खरे॥
फल फूलों से धरा सजाई।
माता तुमने कृपा बरसाई॥
हरित रूप अति मन को भाता।
शाकंभरी नाम जग गाता॥
दुर्गा रूप धरा जब माता।
दुष्टों का संहार कर डाला॥
शुंभ निशुंभ आदि दैत्य मारे।
देवों के तुम काज संवारे॥
महिषासुर का मद हर डाला।
धर्म की रक्षा की रखवाला॥
सिंह सवारी अति मनोहर।
माता का रूप लगे अति सुंदर॥
त्रिशूल हाथ में शोभा पाता।
चक्र खड्ग भी रूप सजाता॥
कमल समान मुखड़ा प्यारा।
भक्तों को लगता अति न्यारा॥
लाल चुनरिया तन पर सोहे।
माथे बिंदी मन को मोहे॥
माता के दरबार में आकर।
भक्त पुकारें शीश नवाकर॥
जो भी श्रद्धा से ध्यान लगाता।
माता का आशीष वह पाता॥
अन्न-धन की देवी भवानी।
सदा रहो भक्तों की रानी॥
घर में सुख-शांति भर देना।
भक्ति का दीप हृदय में देना॥
अन्न का कभी अभाव न होवे।
हर घर में मंगल दीपक सोहे॥
किसान तुम्हें शीश नवाते।
अन्न उगाकर गुण गाते॥
वनस्पति की तुम रखवाली।
प्रकृति तुम्हारी शक्ति निराली॥
धरती माता का रूप तुम्हारा।
जीवन का तुम मूल सहारा॥
जो जन माता नाम पुकारे।
माता उसके कष्ट निवारे॥
संकट में जो तुम्हें ध्यावे।
माता उसका साथ निभावे॥
रोग शोक भय दूर भगाओ।
मन में नई उमंग जगाओ॥
मोह माया से मुक्त कराओ।
सत्य धर्म का मार्ग दिखाओ॥
ममता करुणा रूप तुम्हारा।
भक्तों को है प्राण से प्यारा॥
नवरात्र में जो दीप जलाए।
माता का गुणगान सुनाए॥
श्रद्धा से चालीसा गावे।
माता का आशीष वह पावे॥
शाकंभरी माँ दया करो।
भक्तों पर करुणा धरा करो॥
अन्नपूर्णा जग की माता।
सदा रहो तुम सबकी त्राता॥
हम पर अपनी कृपा बरसाओ।
सद्बुद्धि और शक्ति दिलाओ॥
माता तेरे चरणों में आकर।
शीश झुकाएँ मन से गाकर॥
जय जय शाकंभरी भवानी।
जय जगदंबे मात कल्याणी॥
शताक्षी माता जय जयकारी।
करो कृपा माँ संकटहारी॥
अंत समय जब प्राण हमारे।
नाम तुम्हारा हों अधरों प्यारे॥
चरण कमल में स्थान मिले माँ।
भक्ति का सच्चा ज्ञान मिले माँ॥
जय जय शाकंभरी माता।
जय जगजननी जग की त्राता॥
🌸 शाकंभरी माता का स्वरूप
माँ शाकंभरी को देवी के करुणामयी स्वरूप के रूप में देखा जाता है। उनके हाथों में विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ, फल, अन्न और वनस्पतियाँ दर्शाने वाली प्रतिमाएँ कई परंपराओं में मिलती हैं।
उनका स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि मानव जीवन प्रकृति और अन्न से गहराई से जुड़ा हुआ है।
भारतीय परंपरा में अन्न को केवल भोजन नहीं बल्कि जीवन का आधार और ईश्वर का प्रसाद भी माना गया है। इसलिए माँ शाकंभरी की उपासना में अन्न के प्रति सम्मान का भाव महत्वपूर्ण है।
🌿 माँ शाकंभरी और शताक्षी देवी
शाकंभरी देवी से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में शताक्षी देवी का भी उल्लेख मिलता है।
“शताक्षी” का अर्थ सामान्यतः सौ नेत्रों वाली देवी बताया जाता है। देवी के करुणामयी रूप और उनके नेत्रों से बहने वाले अश्रुओं से वर्षा होने की कथा शाकंभरी परंपरा से जुड़ी हुई है।
यह कथा प्रकृति और जीवन के लिए जल के महत्व को भी प्रतीकात्मक रूप से दर्शाती है।
🌾 शाकंभरी माता और अन्न का महत्व
माँ शाकंभरी की उपासना का एक महत्वपूर्ण संदेश है—अन्न का सम्मान।
हमारे जीवन में भोजन खेतों, जल, मिट्टी, सूर्य, वर्षा, किसानों और प्रकृति के अनेक घटकों के सहयोग से आता है।
इस दृष्टि से शाकंभरी देवी की पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और अन्न के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है।
अन्न की बर्बादी न करना और जरूरतमंदों को भोजन कराना इस भावना को व्यवहार में उतारने के सुंदर तरीके हो सकते हैं।
🪔 श्री शाकंभरी माता चालीसा पाठ की सरल विधि
माता की पूजा और चालीसा पाठ सरल तरीके से किया जा सकता है।
पाठ की विधि:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान को साफ करें।
- माँ शाकंभरी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- दीपक और धूप जलाएँ।
- माता को फूल और फल अर्पित करें।
- संभव हो तो हरी सब्जियाँ या मौसमी फल नैवेद्य के रूप में रखें।
- माता का ध्यान करें।
- श्रद्धापूर्वक शाकंभरी चालीसा का पाठ करें।
- अंत में आरती और प्रार्थना करें।
- अन्न की बर्बादी न करने तथा जरूरतमंदों की सहायता करने का संकल्प लें।
📅 शाकंभरी माता की पूजा कब की जाती है?
माँ शाकंभरी की उपासना विशेष रूप से शाकंभरी नवरात्रि के अवसर पर की जाती है।
हालांकि माता की पूजा और चालीसा पाठ किसी भी दिन श्रद्धा से किया जा सकता है।
नवरात्रि के दौरान भक्त माता के मंदिरों में दर्शन करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और भजन-कीर्तन में भाग लेते हैं।
🕉️ माँ शाकंभरी का मंत्र
माँ शाकंभरी की उपासना में सरल नाम-स्मरण किया जा सकता है:
ॐ शाकंभरी देव्यै नमः।
Om Shakambhari Devyai Namah
भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं।
🌼 श्री शाकंभरी चालीसा पाठ के आध्यात्मिक लाभ
भक्तिभाव से चालीसा का पाठ करने वाले लोग इसे आध्यात्मिक रूप से इन भावनाओं से जोड़ते हैं:
- मन को एकाग्र करने में सहायता
- माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति
- प्रकृति और अन्न के प्रति कृतज्ञता
- सकारात्मक सोच को बढ़ावा
- धैर्य और आत्मविश्वास की भावना
- नियमित पूजा-पाठ की आदत
- सेवा और दान की प्रेरणा
इन लाभों को आध्यात्मिक और आस्थात्मक अनुभव के रूप में समझना चाहिए। इन्हें किसी बीमारी या अन्य समस्या का निश्चित चिकित्सकीय उपचार नहीं माना जाना चाहिए।
🌺 माँ शाकंभरी की पूजा में क्या अर्पित करें?
माँ शाकंभरी को उनकी प्रकृति और वनस्पति से जुड़ी मान्यता के कारण फल, सब्जियाँ और अन्न अर्पित करने की परंपरा कुछ स्थानों पर देखने को मिलती है।
पूजा में स्थानीय परंपरा और परिवार की मान्यताओं के अनुसार सामग्री का उपयोग किया जा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा और अन्न के प्रति सम्मान।
❓ श्री शाकंभरी माता चालीसा से जुड़े सामान्य प्रश्न
1. शाकंभरी माता कौन हैं?
शाकंभरी माता को देवी आदिशक्ति के एक स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। उनका संबंध अन्न, फल, वनस्पति और प्रकृति की जीवनदायिनी शक्ति से जोड़ा जाता है।
2. शाकंभरी माता को शताक्षी क्यों कहा जाता है?
धार्मिक कथा में देवी के सौ नेत्रों से करुणा के अश्रु बहने और उनसे वर्षा होने का वर्णन मिलता है। इसी कारण उन्हें शताक्षी नाम से भी संबोधित किया जाता है।
3. शाकंभरी माता की पूजा कब की जाती है?
विशेष रूप से शाकंभरी नवरात्रि के दौरान माता की पूजा की जाती है। इसके अलावा भक्त किसी भी दिन श्रद्धा से उनकी आराधना कर सकते हैं।
4. शाकंभरी माता का संबंध किससे है?
धार्मिक परंपरा में उनका संबंध अन्न, फल, सब्जियों, वनस्पति, जल और प्रकृति की जीवनदायिनी शक्ति से जोड़ा जाता है।
5. शाकंभरी माता का मंत्र क्या है?
सरल रूप में “ॐ शाकंभरी देव्यै नमः” का स्मरण किया जा सकता है।
6. क्या शाकंभरी चालीसा रोज पढ़ सकते हैं?
हाँ। भक्त अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार रोज चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
7. शाकंभरी माता को क्या चढ़ाया जाता है?
स्थानीय परंपरा के अनुसार फल, सब्जियाँ, अन्न और अन्य सात्त्विक नैवेद्य अर्पित किए जा सकते हैं।
🙏 माँ शाकंभरी से प्रार्थना
हे माँ शाकंभरी,
हे जगदंबे, हे शताक्षी माता!
हमारे जीवन में अन्न, जल और प्रकृति के महत्व को समझने की बुद्धि दें।
हमारे मन में दया, करुणा और सेवा का भाव जगाएँ।
हमें अन्न का सम्मान करने और जरूरतमंदों की सहायता करने की शक्ति दें।
हमारे परिवार और समस्त जीव-जगत पर अपनी कृपा बनाए रखें।
हमारे मन से भय, अहंकार और नकारात्मकता को दूर करें।
जय माँ शाकंभरी।
जय माँ शताक्षी।
जय जगदंबे भवानी।
🌺 माँ शाकंभरी चालीसा का संदेश
माँ शाकंभरी की उपासना हमें केवल देवी-भक्ति का संदेश नहीं देती, बल्कि प्रकृति और अन्न के प्रति कृतज्ञता की याद भी दिलाती है।
जल, अन्न, वनस्पति और कृषि मानव जीवन के आधार हैं। इसलिए माता की आराधना के साथ यदि हम भोजन की बर्बादी रोकें, पेड़-पौधों की रक्षा करें और भूखे व्यक्ति को भोजन कराएँ, तो यह भक्ति के भाव को जीवन में उतारने का सुंदर प्रयास होगा।
माँ शाकंभरी हमें श्रद्धा के साथ सेवा, करुणा और प्रकृति-सम्मान का मार्ग दिखाएँ।
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