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श्री नवग्रह चालीसा | Navgrah Chalisa Lyrics in Hindi | संपूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व

श्री नवग्रह चालीसा | Navgrah Chalisa Lyrics in Hindi | संपूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व

श्री नवग्रह चालीसा | Navgrah Chalisa Lyrics in Hindi | संपूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व

23 Visited Chalisa Collection • Updated: Monday, 14 September 2026

श्री नवग्रह चालीसा | Navgrah Chalisa Lyrics in Hindi | संपूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व


श्री नवग्रह चालीसा: संपूर्ण पाठ, अर्थ, महत्व और पाठ विधि

श्री नवग्रह चालीसा नौ ग्रहों—सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु—की स्तुति को समर्पित एक भक्तिपूर्ण पाठ है। हिंदू ज्योतिष परंपरा में नवग्रहों को जीवन के विभिन्न पक्षों से जोड़ा जाता है और नवग्रह उपासना को ग्रहों के प्रति श्रद्धा एवं आध्यात्मिक साधना का एक माध्यम माना जाता है।

नवग्रह चालीसा में क्रमशः सभी नौ ग्रहों की स्तुति की गई है। भक्त इसे ग्रह शांति, मानसिक संतुलन, सकारात्मक भाव और आध्यात्मिक साधना के उद्देश्य से श्रद्धापूर्वक पढ़ते हैं।

नोट: नवग्रह चालीसा के विभिन्न स्रोतों में कुछ शब्दों और पंक्तियों के पाठांतर मिलते हैं। नीचे दिया गया पाठ प्रचलित सुंदरदास-सम्बद्ध संस्करण पर आधारित है।


🕉️ श्री नवग्रह चालीसा

॥ दोहा ॥

श्री गणपति गुरुपद कमल,
प्रेम सहित सिरनाय।
नवग्रह चालीसा कहत,
शारद होत सहाय॥

जय जय रवि शशि सोम बुध,
जय गुरु भृगु शनि राज।
जयति राहु अरु केतु ग्रह,
करहुं अनुग्रह आज॥


॥ श्री सूर्य स्तुति ॥

प्रथमहि रवि कहं नावौं माथा,
करहु कृपा जनि जानि अनाथा।

हे आदित्य दिवाकर भानू,
मैं मति मंद महा अज्ञानू।

अब निज जन कहं हरहु कलेशा,
दिनकर द्वादश रूप दिनेशा।

नमो भास्कर सूर्य प्रभाकर,
अर्क मित्र अघ मोघ क्षमाकर॥


॥ श्री चंद्र स्तुति ॥

शशि मयंक रजनीपति स्वामी,
चंद्र कलानिधि नमो नमामी।

राकापति हिमांशु राकेशा,
प्रणवत जन तन हरहु कलेशा।

सोम इंदु विधु शांति सुधाकर,
शीत रश्मि औषधि निशाकर।

तुम शोभित सुंदर भाल महेशा,
शरण शरण जन हरहु कलेशा॥


॥ श्री मंगल स्तुति ॥

जय जय मंगल सुख दाता,
लौहित भौमादिक विख्याता।

अंगारक कुज ऋणहारी,
करहु दया यही विनय हमारी।

हे महीसुत क्षितिसुत सुखराशी,
लोहितांग जय जन अघनाशी।

अगम अमंगल अब हर लीजै,
सकल मनोरथ पूर्ण कीजै॥


॥ श्री बुध स्तुति ॥

जय शशि नंदन बुध महाराजा,
करहु सकल जन कहं शुभ काजा।

दीजै बुद्धि बल सुमति सुजाना,
कठिन कष्ट हरि करि कल्याना।

हे तारासुत रोहिणी नंदन,
चंद्र सुवन दुःख द्वंद्व निकंदन।

पूजहु आस दास कहुं स्वामी,
प्रणत पाल प्रभु नमो नमामी॥


॥ श्री बृहस्पति स्तुति ॥

जयति जयति जय श्री गुरु देवा,
करहु सदा तुम मेरी सेवा।

देवाचार्य तुम देव गुरु ज्ञानी,
इंद्र पुरोहित विद्या दानी।

वाचस्पति बागीश उदारा,
जीव बृहस्पति नाम तुम्हारा।

विद्या सिंधु अंगिरा नामा,
करहु सकल विधि पूर्ण कामा॥


॥ श्री शुक्र स्तुति ॥

शुक्र देव तल जल जामा,
दास निरंतर ध्यान लगामा।

हे उशना भार्गव भृगुनंदन,
दैत्य पुरोहित दुष्ट निकंदन।

भृगुकुल भूषण दूषण हारी,
हरहु नेष्ट ग्रह करहु सुखारी।

तुम द्विजवर जोशी सिरताजा,
नर शरीर के तुम ही राजा॥


॥ श्री शनि स्तुति ॥

जय श्री शनि देव रविनंदन,
जय कृष्ण सौरि जगवंदन।

पिंगल मंद रौद्र यम नामा,
त्रिशूल आदि कोणस्थ ललामा।

वक्र दृष्टि पिप्पल तन साजा,
क्षण में करता रंक क्षण राजा।

ललाट स्वर्ण पद करत निहाला,
हरहु विपति छाया के लाला॥


॥ श्री राहु स्तुति ॥

जय जय राहु गगन प्रवेसा,
तुमहि चंद्र आदित्य ग्रसेसा।

रवि शशि अरि स्वरभानु धारा,
शिखी आदि बहु नाम तुम्हारा।

सैंहिकेय तुम निशाचर राजा,
अर्धकाय जग राखहु लाजा।

यदि ग्रह समय पाय कहि आवहु,
सदा शांति रहि सुख उपजावहु॥


॥ श्री केतु स्तुति ॥

जय श्री केतु कठिन दुःखहारी,
करहु सुजन हित मंगलकारी।

ध्वजयुत रुण्ड रूप विकराला,
घोर रौद्रतन अधम कालां।

शिखी तारिका ग्रह बलवाना,
महाप्रताप न तेज ठिकाना।

वाहन मीन महा शुभकारी,
दीजै शांति दया उर धारी॥


॥ समापन ॥

तीर्थराज प्रयाग सुपासा,
बसे राम के सुंदर दासा।

काकरा ग्रामहि पुरे तिवारी,
दुवाश्रम जन दुःख हारी॥

नवग्रह शांति लिख्यो सुख हेतु,
जन तन कष्ट उतारन सेतु।

जो नित पाठ करे चित लावे,
सब सुख भोगी परम पद पावे॥

धन्य नवग्रह देव प्रभु,
महिमा अगम अपार।

नित नव मंगल मोद ग्रह,
जगत जनन सुखद्वार॥

यह चालीसा नवग्रह,
विरचित सुंदरदास।

पढ़त प्रेमयुक्त बढ़त सुख,
सर्वानंद हुलास॥


🌞 नवग्रह कौन-कौन से हैं?

हिंदू ज्योतिष परंपरा में नवग्रह के रूप में इन नौ ग्रहों की उपासना की जाती है:

क्रम नवग्रह सामान्य संबद्धता
1 ☀️ सूर्य आत्मबल, प्रतिष्ठा और ऊर्जा
2 🌙 चंद्र मन, भावनाएँ और मानसिक शांति
3 ♂️ मंगल साहस, शक्ति और पराक्रम
4 ☿ बुध बुद्धि, वाणी और संचार
5 ♃ बृहस्पति ज्ञान, गुरु और धर्म
6 ♀️ शुक्र सौंदर्य, सुख और कला
7 ♄ शनि अनुशासन, कर्म और धैर्य
8 ☊ राहु महत्वाकांक्षा और अप्रत्याशित अनुभव
9 ☋ केतु वैराग्य, आध्यात्मिकता और अंतर्मुखता

ये ज्योतिषीय और धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रतीकात्मक संबंध हैं; इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कारण-परिणाम संबंध नहीं माना जाना चाहिए।


🙏 नवग्रह चालीसा का महत्व

नवग्रह चालीसा का मूल भाव नौ ग्रहों के प्रति श्रद्धा और प्रार्थना है। इसमें प्रत्येक ग्रह का अलग-अलग स्मरण किया गया है।

भक्त इसे विशेष रूप से तब पढ़ते हैं जब वे अपने जीवन में शांति, धैर्य और सकारात्मकता के लिए आध्यात्मिक साधना करना चाहते हैं।

ज्योतिषीय परंपरा में ग्रहों की स्थिति को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ा जाता है। इसी कारण कुछ लोग कुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार नवग्रह पूजा या पाठ करते हैं।

हालांकि किसी ग्रह के पाठ से किसी बीमारी, आर्थिक समस्या, नौकरी या अन्य जीवन-समस्या का निश्चित समाधान होने का दावा करना उचित नहीं है। धार्मिक पाठ को आस्था और आध्यात्मिक साधना के रूप में देखना बेहतर है।


🪔 नवग्रह चालीसा पाठ की सरल विधि

नवग्रह चालीसा का पाठ करने के लिए कोई कठिन प्रक्रिया आवश्यक नहीं है।

सरल पाठ विधि:

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  2. पूजा स्थान को साफ करें।

  3. भगवान गणेश और अपने इष्टदेव का स्मरण करें।

  4. नवग्रहों को मन से प्रणाम करें।

  5. दीपक जलाएँ।

  6. कुछ क्षण शांत होकर ध्यान करें।

  7. श्रद्धापूर्वक नवग्रह चालीसा का पाठ करें।

  8. अंत में सभी ग्रहों से शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।

  9. परिवार और सभी प्राणियों के कल्याण की कामना करें।


📅 नवग्रह चालीसा कब पढ़ें?

नवग्रह चालीसा का पाठ अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार किया जा सकता है।

विशेष रूप से नवग्रह पूजा, ग्रह शांति से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान या ज्योतिषीय परंपरा में बताए गए अवसरों पर इसका पाठ किया जाता है।

यदि किसी व्यक्ति को अपनी कुंडली में किसी ग्रह से संबंधित चिंता है, तो धार्मिक पाठ के साथ किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेना अलग विषय है।


🌺 नवग्रहों के सरल मंत्र

नवग्रह पूजा में प्रत्येक ग्रह का अपना मंत्र भी प्रचलित है। उदाहरण के लिए:

सूर्य: ॐ सूर्याय नमः।
चंद्र: ॐ सोमाय नमः।
मंगल: ॐ मंगलाय नमः।
बुध: ॐ बुधाय नमः।
बृहस्पति: ॐ बृहस्पतये नमः।
शुक्र: ॐ शुक्राय नमः।
शनि: ॐ शनैश्चराय नमः।
राहु: ॐ राहवे नमः।
केतु: ॐ केतवे नमः।

इन मंत्रों के जप की संख्या और विधि अलग-अलग परंपराओं में अलग हो सकती है।


🌿 नवग्रह चालीसा पाठ के आध्यात्मिक लाभ

श्रद्धा से नवग्रह चालीसा पढ़ने वाले भक्त इसे निम्न भावों से जोड़ते हैं:

  • मन को एकाग्र करने में सहायता

  • प्रार्थना और भक्ति की भावना विकसित करना

  • धैर्य और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना

  • नवग्रहों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना

  • आध्यात्मिक अनुशासन विकसित करना

  • नियमित पूजा-पाठ की आदत बनाना

इन लाभों को आध्यात्मिक/आस्थात्मक अनुभव के रूप में समझना चाहिए, न कि चिकित्सकीय या वैज्ञानिक गारंटी के रूप में।


❓ नवग्रह चालीसा से जुड़े सामान्य प्रश्न

1. नवग्रह चालीसा क्या है?

नवग्रह चालीसा नौ ग्रहों—सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु—की स्तुति करने वाला भक्तिपाठ है।

2. नवग्रह चालीसा में कितने ग्रहों की स्तुति होती है?

इसमें नौ नवग्रहों की स्तुति की जाती है।

3. क्या नवग्रह चालीसा रोज पढ़ सकते हैं?

हाँ, श्रद्धा और अपनी सुविधा के अनुसार इसका पाठ किया जा सकता है।

4. क्या नवग्रह चालीसा केवल ग्रह दोष होने पर पढ़नी चाहिए?

नहीं। भक्त इसे सामान्य धार्मिक साधना और नवग्रहों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए भी पढ़ सकते हैं।

5. नवग्रह कौन-कौन से हैं?

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु।

6. क्या नवग्रह चालीसा पढ़ने से ग्रह दोष निश्चित रूप से समाप्त हो जाते हैं?

ऐसा निश्चित वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। धार्मिक परंपरा में इसे ग्रह शांति और प्रार्थना की साधना के रूप में माना जाता है।


🕉️ नवग्रह चालीसा का सार

नवग्रह चालीसा का संदेश केवल ग्रहों से जुड़े भय तक सीमित नहीं है। इसका भाव यह भी है कि मनुष्य अपने जीवन में श्रद्धा, संयम, धैर्य, सदाचार और आत्मचिंतन को स्थान दे।

नवग्रहों की उपासना के माध्यम से भक्त प्रकृति और ब्रह्मांड की व्यापक व्यवस्था के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

श्रद्धा रखें, कर्म करते रहें और धैर्य बनाए रखें।

🙏 जय नवग्रह देव

ॐ नवग्रहाय नमः


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