श्री मनसा देवी चालीसा
26 Visited Chalisa Collection • Updated: Tuesday, 15 September 2026

श्री मनसा देवी चालीसा: संपूर्ण पाठ, कथा, महत्व और पूजा विधि
जय माँ मनसा देवी। नागों की अधिष्ठात्री देवी को शत-शत प्रणाम। 🙏
भारत की लोक और देवी-उपासना परंपरा में माँ मनसा देवी का विशेष स्थान है। विशेष रूप से पूर्वी भारत, बंगाल, असम और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में माँ मनसा की पूजा श्रद्धा से की जाती है। उन्हें नागों से संबंधित देवी के रूप में जाना जाता है और अनेक लोककथाओं में उनकी कृपा, तपस्या और भक्तों की रक्षा का वर्णन मिलता है।
माँ मनसा का नाम आते ही मन में नाग, सावन की हरियाली, लोकगीत और देवी-भक्ति की अनेक छवियाँ उभर आती हैं। लेकिन उनकी उपासना का भाव केवल भय से जुड़ा हुआ नहीं है। भक्त उन्हें शक्ति, संरक्षण, समृद्धि और मनोकामना की देवी के रूप में भी याद करते हैं।
श्री मनसा देवी चालीसा माता के स्वरूप, उनकी महिमा और भक्तों के प्रति उनकी कृपा का स्मरण करने वाली भक्तिपूर्ण रचना है। चालीसा का पाठ श्रद्धा से करते हुए भक्त माँ से परिवार की सुख-शांति, सद्बुद्धि और जीवन में सकारात्मकता की प्रार्थना करते हैं।
🌺 माँ मनसा देवी कौन हैं?
माँ मनसा देवी को भारतीय परंपरा में नाग देवी के रूप में जाना जाता है। बंगाल और पूर्वी भारत की लोक परंपराओं में उनकी पूजा विशेष रूप से प्रचलित रही है।
धार्मिक कथाओं में मनसा देवी की उत्पत्ति और उनके परिवार से जुड़ी अलग-अलग परंपराएँ मिलती हैं। कुछ कथाओं में उन्हें भगवान शिव से संबंधित माना गया है, जबकि लोककथाओं में उनका संबंध नागों और नागराज वासुकी से भी जोड़ा जाता है।
इसी कारण माँ मनसा की कथा केवल एक धार्मिक कहानी नहीं, बल्कि भारतीय लोक-संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
🕉️ श्री मनसा देवी चालीसा
॥ दोहा ॥
जय जय मनसा मात भवानी,
करहु कृपा हे जग कल्याणी।
नागों की तुम अधिष्ठात्री,
भक्तों की हो हितकारी॥
मन से जो तुम्हें ध्यावे माता,
दूर करो उसके भय-विपाता।
श्रद्धा से जो शीश नवाए,
माँ उसकी सुधि लेने आए॥
॥ चौपाई ॥
जय जय मनसा मात भवानी।
जग में तेरी महिमा बखानी॥
नाग लोक की तुम अधीशा।
भक्त हृदय में तुम जगदीशा॥
शिव की शक्ति रूप तुम माता।
जग में फैली तेरी गाथा॥
वासुकि की बहना कहलाओ।
भक्तों के संकट हर जाओ॥
नागों पर अधिकार तुम्हारा।
माँ तुम ही सबका रखवारा॥
सावन मास में पूजा पावो।
भक्तों के मन में बस जावो॥
दूध और पुष्प चढ़ाएँ माता।
श्रद्धा से जो तुम्हें ध्याता॥
गाँव-गाँव में नाम तुम्हारा।
लोक हृदय में रूप तुम्हारा॥
मन की आशा लेकर आए।
तेरे द्वारे शीश झुकाए॥
दुख में जो माता को पुकारे।
तुम बन जाती उसके सहारे॥
भय से जिसका मन घबराए।
माँ का नाम उसे धीरज दे जाए॥
अज्ञान का अंधकार मिटाओ।
सच्चे पथ की राह दिखाओ॥
मन में दया भाव उपजाओ।
द्वेष और क्रोध दूर भगाओ॥
माँ तुम शक्ति स्वरूपा भारी।
भक्तों की तुम हो रखवारी॥
नाग पंचमी के शुभ दिन पर।
पूजे जाओ भक्त मन भर॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ाएँ।
भक्ति भाव से शीश झुकाएँ॥
मनसा माता कृपा करो माँ।
भक्तों की विनती सुन लो माँ॥
परिवार में सुख शांति रहे।
मन में सदा संतोष रहे॥
बच्चों पर भी कृपा तुम्हारी।
रहे सदा छाया सुखकारी॥
घर में प्रेम बढ़े दिन-राती।
दूर रहे हर विपदा आती॥
सत्य मार्ग पर हमें चलाओ।
भक्ति का दीप हृदय में जलाओ॥
लोभ मोह का जाल हटाओ।
मन को निर्मल रूप बनाओ॥
जो भी तेरे द्वार पर आए।
खाली मन लेकर न लौटाए॥
माँ के चरणों में जो झुकता।
उसका मन फिर क्यों दुखता॥
दया करो हे नागेश्वरी।
तुम हो माता मंगलकारी॥
मनसा माता नाम तुम्हारा।
भक्तों को लगता सबसे प्यारा॥
नागों की तुम शक्ति महान।
तुमसे पावन सकल जहान॥
शिव चरणों की भक्त भवानी।
तेरी महिमा अमिट पुरानी॥
जो नित तेरा ध्यान लगाए।
मन में शांति अनुभव पाए॥
संकट में जो नाम पुकारे।
माँ उसके बनो सहारे॥
भूल-चूक सब क्षमा हमारी।
माँ तुम हो जग की महतारी॥
मनसा माता दया दिखाओ।
भक्ति शक्ति का भाव जगाओ॥
हम सब पर आशीष बरसाओ।
सद्बुद्धि और धैर्य दिलाओ॥
जीवन में शुभ कर्म कराएँ।
सबके प्रति सद्भाव बढ़ाएँ॥
अंत समय भी नाम तुम्हारा।
रहे हृदय में माँ सहारा॥
जय जय मनसा मात भवानी।
तुम हो जग की शक्ति सयानी॥
जो जन श्रद्धा से गुण गाए।
माँ उसकी लाज सदा बचाए॥
॥ समापन दोहा ॥
मनसा माता चरण में, अर्पित तन मन प्राण।
कृपा दृष्टि रखिए सदा, हे माता भगवान॥
नागेश्वरी जगदंबिका, सुन लो भक्त पुकार।
भक्ति, शक्ति, शांति दो, माँ भवसागर पार॥
🌿 मनसा देवी की कथा
माँ मनसा देवी से जुड़ी कथाएँ अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूपों में मिलती हैं। बंगाल की लोकपरंपरा में मनसा मंगल साहित्य विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इन कथाओं में देवी मनसा की शक्ति, उनकी उपासना और भक्तों की परीक्षा से जुड़े अनेक प्रसंग मिलते हैं।
लोककथाओं में चाँद सौदागर और उनके परिवार की कहानी भी बहुत प्रसिद्ध है। चाँद सौदागर भगवान शिव के भक्त बताए जाते हैं और वे मनसा देवी की पूजा स्वीकार नहीं करना चाहते थे। कथा आगे कई कठिन घटनाओं से गुजरती है और अंततः मनसा देवी की उपासना की प्रतिष्ठा स्थापित होती है।
इन कथाओं को केवल ऐतिहासिक घटनाओं की तरह देखने के बजाय भारतीय लोक-साहित्य और देवी-भक्ति की परंपरा के रूप में समझना अधिक उचित है।
🐍 माँ मनसा और नाग परंपरा
माँ मनसा को नागों की देवी मानने की परंपरा भारत के कई हिस्सों में दिखाई देती है।
विशेष रूप से वर्षा ऋतु में जब साँपों और अन्य जीवों की गतिविधि बढ़ जाती है, तब ग्रामीण समाज में नागों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएँ और पूजा-पद्धतियाँ अधिक दिखाई देती हैं।
नाग पंचमी के अवसर पर भी माँ मनसा का स्मरण कई क्षेत्रों में किया जाता है।
यह परंपरा हमें प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील रहने की याद भी दिलाती है।
🌸 नाग पंचमी और माँ मनसा की पूजा
नाग पंचमी हिंदू परंपरा में नागों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का पर्व है। कुछ क्षेत्रों में इस दिन माँ मनसा की भी विशेष पूजा की जाती है।
पूजा में क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार फूल, दूध, फल और अन्य नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं।
यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि वास्तविक साँपों को दूध पिलाना उनके लिए उचित नहीं माना जाता। धार्मिक श्रद्धा को सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से निभाना ही बेहतर है।
🪔 मनसा देवी की सरल पूजा विधि
माँ मनसा की पूजा अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार की जा सकती है।
सरल रूप से:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान को साफ करें।
- माँ मनसा देवी का चित्र या प्रतीक स्थापित करें।
- दीपक जलाएँ।
- फूल और फल अर्पित करें।
- श्रद्धा से माता का ध्यान करें।
- मनसा देवी चालीसा का पाठ करें।
- अपनी प्रार्थना माता के सामने रखें।
- अंत में परिवार की सुख-शांति और सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना करें।
पूजा में दिखावे से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और भाव है।
📿 माँ मनसा देवी का सरल मंत्र
माँ की उपासना में श्रद्धा से यह सरल मंत्र जपा जा सकता है:
ॐ मनसायै नमः।
भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इसे 11, 21 या 108 बार जप सकते हैं।
यदि किसी विशेष संप्रदाय या पारिवारिक परंपरा में अलग मंत्र बताया गया हो, तो उसी परंपरा का पालन करना उचित है।
🌼 मनसा देवी चालीसा कब पढ़ें?
माँ मनसा की उपासना के लिए कोई एक अनिवार्य दिन नहीं है। भक्त अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार उनका स्मरण कर सकते हैं।
विशेष रूप से:
- नाग पंचमी
- सावन के महीने में
- सोमवार
- देवी पूजा के अवसर पर
- परिवार की पारंपरिक पूजा के समय
- सुबह या शाम
चालीसा का पाठ किया जा सकता है।
❤️ माँ मनसा की भक्ति का संदेश
माँ मनसा की पूजा से जुड़े लोकविश्वासों में सुरक्षा और संरक्षण की भावना प्रमुख है। लेकिन इससे आगे देखें तो उनकी उपासना हमें प्रकृति के प्रति सम्मान और जीवन के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी देती है।
हर जीव का अपना महत्व है। साँपों को केवल भय की दृष्टि से देखने के बजाय उनके प्राकृतिक स्थान और पर्यावरणीय भूमिका को समझना भी आवश्यक है।
धार्मिक आस्था और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
🌿 मनसा देवी की पूजा से क्या सीख मिलती है?
भय के बजाय श्रद्धा रखें
जीवन में कई ऐसी चीजें होती हैं जिनसे हमें डर लगता है। माँ की उपासना मन को धैर्य और विश्वास देने का एक आध्यात्मिक माध्यम हो सकती है।
प्रकृति का सम्मान करें
नागों से जुड़ी देवी की पूजा हमें प्रकृति और उसके जीवों के प्रति संवेदनशील होने की याद दिलाती है।
मन को शांत रखें
क्रोध, भय और चिंता के समय थोड़ी देर शांत बैठकर ईश्वर का स्मरण करना मन को स्थिर करने में सहायक महसूस हो सकता है।
अच्छे कर्मों का महत्व समझें
सिर्फ पूजा करना ही पर्याप्त नहीं; हमारा व्यवहार, वाणी और कर्म भी हमारी भक्ति का हिस्सा होने चाहिए।
🙏 माँ मनसा देवी से प्रार्थना
हे माँ मनसा देवी,
नागेश्वरी, जगदंबिका और करुणामयी माता,
हम पर अपनी कृपा बनाए रखें।
हमारे मन से अनावश्यक भय दूर करें।
हमें कठिन परिस्थितियों में धैर्य दें।
हमारे भीतर दया, संयम और सद्भाव का भाव जगाएँ।
हमारे परिवार में प्रेम और शांति बनी रहे।
हमारे बच्चों को सद्बुद्धि मिले।
हम प्रकृति और सभी जीवों के प्रति संवेदनशील बनें।
हे माँ,
हमारे मन को अपने चरणों की भक्ति से जोड़कर सही मार्ग पर चलने की शक्ति दें।
जय माँ मनसा देवी।
जय जगदंबे। 🙏
❓ श्री मनसा देवी चालीसा से जुड़े सामान्य प्रश्न
माँ मनसा देवी कौन हैं?
माँ मनसा देवी को भारतीय लोक और धार्मिक परंपराओं में नागों से संबंधित देवी के रूप में पूजा जाता है। विशेष रूप से बंगाल और पूर्वी भारत में उनकी उपासना की लंबी परंपरा है।
मनसा देवी की पूजा कब की जाती है?
नाग पंचमी और सावन के समय कई क्षेत्रों में माँ मनसा की पूजा विशेष रूप से की जाती है। हालांकि भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी भी दिन माता का स्मरण कर सकते हैं।
माँ मनसा का संबंध किससे माना जाता है?
अलग-अलग धार्मिक और लोक परंपराओं में माँ मनसा के संबंध को अलग-अलग रूप में बताया गया है। कुछ परंपराएँ उन्हें भगवान शिव से संबंधित मानती हैं और नाग परंपरा में उनका विशेष स्थान है।
क्या मनसा देवी नागों की देवी हैं?
हाँ, भारतीय लोकविश्वासों में माँ मनसा को नागों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में जाना जाता है।
क्या मनसा देवी चालीसा रोज पढ़ सकते हैं?
हाँ। यदि श्रद्धा हो तो सुबह या शाम नियमित रूप से चालीसा पढ़ी जा सकती है।
क्या नाग पंचमी पर साँप को दूध पिलाना चाहिए?
वास्तविक साँपों को दूध पिलाना उचित नहीं है, क्योंकि साँप सामान्यतः दूध पीने वाले जीव नहीं हैं और इससे उन्हें नुकसान हो सकता है। पूजा को प्रतीकात्मक और सुरक्षित तरीके से करना बेहतर है।
🌺 अंतिम बात
माँ मनसा देवी की भक्ति हमें केवल एक देवी का स्मरण नहीं कराती, बल्कि भारतीय लोकपरंपरा, प्रकृति और जीवों के प्रति सम्मान की भावना से भी जोड़ती है।
जब हम चालीसा पढ़ें तो केवल अपनी इच्छाओं की सूची लेकर माता के सामने न बैठें। कुछ क्षण अपने भीतर भी देखें—क्या हमारी वाणी में सत्य है? क्या हमारे व्यवहार में करुणा है? क्या हम प्रकृति और दूसरे जीवों के प्रति संवेदनशील हैं?
शायद यही किसी भी भक्ति का सबसे सुंदर अर्थ है।
माँ मनसा देवी सभी के जीवन में श्रद्धा, धैर्य, सद्बुद्धि और शांति का प्रकाश बनाए रखें।
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